बच्चों की अधिकार आधारित रेपोर्टिंग पर संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित
परवाह के माध्यम से मानव तस्करी रोकथाम के लिए 20 गांव को चिन्हित कर हो रहा है दामिन पहल: दिलीप कुमार दुबे
दुमका ब्यूरो
दुमका। प्रवाह संस्था ने जिले के पत्रकारगण के साथ शनिवार को बच्चों की अधिकार आधारित रेपोर्टिंग पर संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन दुमका के लोमाई हवेली में किया । कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले के अन्य हितधारकों सहित मीडिया की भागीदारी और सक्रियता से बाल यौन शोषण और मानव तस्करी के जोखिमों को कम करके बच्चों के अधिकारों को बढ़ावा देने को लेकर पहल करना है। कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति के सदस्य डॉक्टर राज कुमार उपाध्याय ने यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम-2012 के अंतर्गत उल्लेखित बाल यौन शोषण की परिभाषा, सजा के प्रावधान, बयान दर्ज करने की प्रक्रिया के बारे विस्तार से बताया। साथ ही उन्होंने किशोर न्याय (बालकों का देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम-2015 के अंतर्गत बताया की विधि विवादित बच्चों का मामला किशोर न्याय बोर्ड और देखभाल और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बच्चों जुड़ी समस्याओं के मामले में बाल कल्याण समिति निर्णय लेती हैं। दोनों अधिनियमों में बच्चों का सम्मान और गोपनीयता के रक्षा के मामले में मीडिया प्रकाशन संबंधित धाराओं के बारे में उन्होंने ने विस्तार से बताया। इसके अलावा मानव तस्करी से संबंधित विषय पर उन्होंने बताया कि किसी बच्चे के लापता होने के मामले में पहले सनहा दर्ज होगा। यदि 24 घंटे के भीतर बच्चा नहीं मिलता है तो एफ. आई. आर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस बीच बच्चे के तलाश के लिए ऑनलाइन पोर्टल सहित पुलिस द्वारा मीडिया के माध्यम से प्रयास किया जाना होता है। फिर भी यदि चार महीने तक बच्चा नहीं मिलता है तो उसे तस्करी मान लिया जाता हैं और मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट में दर्ज किया जाता है।
श्वेत पत्र, दुमका के रेपोर्टर सुमंगल ओझा ने बाल यौन शोषण और मानव तस्करी के जोखिमों को कम करने के लिए ऐसे कार्यशालाओं को पंचायत और प्रखण्ड स्तर पर करने का सुझाव दिया और बताया कि ऐसे मामलों में माता-पिता को जागरूक और सतर्क होना होगा, उन्हें नजर रखनी होगी की उनके बच्चे क्या कर रहे हैं और किस माहौल में है। सभी सतर्कता और भागीदारी से ही बाल संरक्षण का मजबूत तंत्र संभव होगा।
सन्मार्ग के जिला ब्यूरो प्रमुख अमरेन्द्र सुमन ने बाल संरक्षण में टेक्नोलॉजी की भूमिका को रेखांकित करते हुए स्मार्ट फोन के अच्छे और बुरे परिणामों के बारे में बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों सहित वयस्कों में किताब का अध्ययन बेहद जरूरी हैं। स्मार्ट फोन में अध्ययन के लिए सबकुछ है लेकिन बुरी लत लगाने वाली तमाम चीजें है जो बच्चें की रचनात्मकता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए माता-पिता और हितधारकों को जागरूक होना होगा ताकि बच्चे को सुरक्षित वातावरण दिया जा सकें ।
प्रवाह संस्था के सचिव दिलीप कुमार दुबे ने बताया कि संस्था सुरक्षित बचपन के लिए दामीन पहल परियोजना के तहत शिकारीपाड़ा प्रखण्ड के बीस गाँव में मानव तस्करी और बाल यौन शोषण के जोखिमों को सामुदायिक भागीदारी से कम करने हेतु कार्य कर रहीं हैं। ग्राम और पंचायत स्तरीय स्थानीय संस्थाओं को मजबूत बनाना, सामुदायिक जागरूकता, सेवा प्रदाता, कर्तव्य वाहक और अन्य हितधारकों के लिए विभागीय सहयोग से संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित करना साथ ही पीड़ित और संभावित पीड़ितों को चिन्हित करके उन्हें समर्थन सेवाओं की मदद पहुंचाना शामिल हैं। इसके लिए सभी का सहयोग मिल रहा है। आपलोगों के सहयोग के बिना कुछ संभव नहीं है इसलिए आपलोगों से हम हमेशा सहयोग के अपेक्षा रखते हैं।
कार्यशाला में डॉ राजकुमार अमरेंद्र शिवमंगल ओझा, बसंत कुमार भालोटिया, अमित बरियार, विनोद सारस्वत, एस.के. झा. ‘सुमन’, डॉक्टर सिकंदर कुमार, पंकज भंडारी, संदीप कुमार राम,
एवं प्रवाह के कार्यकर्ता प्रेम कुमार, मारथा हाँसदा और बिमोली हेमब्रम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।


