नई दिल्ली । अगले सप्ताह लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पेश किया जाएगा, जिसे लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर टकराव की आशंका जताई जा रही है। अधिकतर विपक्षी दल संशोधन विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहे हैं। कैबिनेट ने वक्फ संशोधन विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है, जो संसदीय पैनल की सिफारिशों पर आधारित हैं। यह विधेयक अगस्त 2024 में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा पेश किया गया था, जिसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया। इस पैनल ने 655 पृष्ठों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की, जिसे इस महीने की शुरुआत में संसद में पेश किया गया।
मुख्य संशोधन और विवाद के बिंदु
वक्फ बाय यूजर का प्रावधान हटा दिया गया है। अब केवल रजिस्टर्ड वक्फ बाय यूजर को ही वैध माना जाएगा। इस बदलाव से उन संपत्तियों पर असर पड़ेगा, जिन पर स्वामित्व को लेकर विवाद हैं या जो सरकार के नियंत्रण में हैं। वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर सिफारिश की गई है। पैनल ने सुझाव दिया है कि वक्फ बोर्ड में चार गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जा सकता है। विवाद निपटाने का अधिकार जिला कलेक्टरों से हटाकर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को देने की सिफारिश की गई है।
विपक्ष की आपत्तियां और संभावित टकराव
जेपीसी की रिपोर्ट को पैनल में बहुमत से समर्थन मिला, लेकिन विपक्षी दलों के 11 सांसदों ने इस पर असहमति जताई और अपनी आपत्ति दर्ज कराई। विपक्ष का कहना है कि सरकार इस विधेयक के माध्यम से वक्फ संपत्तियों को संशोधित करने और उनके अधिकार सीमित करने की कोशिश कर रही है। अब देखना यह है कि जब वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश होगा तो सदन में हंगामा होता है या नहीं? वैसे बिल को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच घमासान मचने की शंका जाहिर की जा रही है।


