नई दिल्ली । पूर्व सैनिक मंदीप सिंह से वादा किया गया था कि उन्हें अमेरिका में कानूनी रूप से प्रवेश दिलाया जाएगा, लेकिन उनका जीवन खतरे में पड़ गया और उन्हें मगरमच्छों व सांपों से निपटना पड़ा, सिख होने के बावजूद दाढ़ी कटवानी पड़ी और कई दिनों तक बिना भोजन के रहना पड़ा। मगर अमृतसर में अपने परिवार के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करने का उनका सपना 27 जनवरी को उस समय टूट गया, जब मैक्सिको के तिजुआना के रास्ते अमेरिका में घुसने की कोशिश करते समय उन्हें अमेरिकी सीमा गश्ती दल ने गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद समूह को पनामा के जंगलों को पार कराया गया। उन्होंने कहा, यहां हमें साथी यात्रियों ने बताया कि अगर हम बहुत अधिक सवाल पूछेंगे तो हमें गोली मार दी जाएगी। 13 दिनों तक हम खतरनाक रास्ते से गुजरे जिसमें 12 नहरें शामिल थीं। मगरमच्छ, सांप – हमें सब कुछ सहना पड़ा। कुछ लोगों को खतरनाक सरीसृपों से निपटने के लिए लाठियां दी गईं। मनदीप ने कहा, हम अधपकी रोटियां और कभी-कभी नूडल्स खाते थे, क्योंकि उचित भोजन तो दूर की बात थी। हम दिन में 12 घंटे यात्रा करते थे।
मंदीप ने बताया कि पनामा पार करने के बाद समूह ने कोस्टा रिका में रुककर होंडुरास की यात्रा शुरू की, जहां, हमें अंततः चावल खाने को मिला। मनदीप ने बताया, लेकिन निकारागुआ से गुजरते समय हमें कुछ खाने को नहीं मिला। हालांकि ग्वाटेमाला में हमें किस्मत से दही चावल मिल गया। जब हम तिजुआना पहुंचे तो मेरी दाढ़ी जबरन काट दी गई। उन्होंने बताया कि 27 जनवरी की सुबह उन्हें बॉर्डर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जब वे अमेरिका में घुसने के लिए सीमा पार कर रहे थे।
उन्होंने कहा, अधिकारियों ने हमें बताया कि हमें निर्वासित कर दिया जाएगा। वापस भेजे जाने से पहले हमें कुछ दिनों तक हिरासत केंद्र में रखा गया। गुरदासपुर जिले के रहने वाले लवप्रीत ने बताया कि वह एक साल पहले घर से चले गए थे।लवप्रीत ने कहा, मेरे ट्रैवल एजेंट ने मुझे डंकी रूट से जाने को कहा, जो सुरक्षित नहीं था। पनामा के जंगलों से गुजरना बहुत खतरनाक था। हम किसी तरह खुद को सांपों, मगरमच्छों और दूसरे जानवरों से बचाने में कामयाब रहे।
लवप्रीत ने कहा, हमें एक कंटेनर में मेक्सिको ले जाया गया। हमें शौच के लिए भी नहीं जाने दिया गया। अगर हम शौच के लिए कहते तो वे हमें पीटते थे।कपूरथला जिले के बीस वर्षीय निशान सिंह ने भी ऐसी ही आपबीती सुनाई। निशान के परिवार ने उन्हें अमेरिका भेजने के लिए 40 लाख रुपए खर्च किए थे। निशान ने कहा, हमें पीटा गया, खाना नहीं दिया गया। हमने 16 दिन जंगल में बिताए, मुख्य रूप से पानी पर जीवित रहे। हमारे मोबाइल फोन और अन्य सामान छीन लिए गए।
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