नई दिल्ली । भारत में स्ट्रोक एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। यह देश में चौथे नंबर पर मौत का कारण बन रहा है और पांचवे नंबर पर अपंगता का कारण भी है। स्ट्रोक के परिणामस्वरूप मरीजों में अक्सर लकवा जैसी शारीरिक अपंगता हो जाती है, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
हालाँकि, स्ट्रोक के इलाज के लिए उपलब्ध तकनीक और थेरेपी बेहद प्रभावी हैं, लेकिन ये केवल 1 प्रतिशत से भी कम लोगों तक पहुंच पाती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि अधिकतर लोग इसके प्रभाव से बच नहीं पाते और उनकी मृत्यु हो जाती है। इसलिए इस गंभीर समस्या के प्रति जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रोक के तीन प्रमुख प्रकार होते हैं। पहला, इश्चेमिक स्ट्रोक, जिसमें खून की नलियां ब्लॉक हो जाती हैं या संकरी हो जाती हैं, जिससे खून की आपूर्ति दिमाग तक नहीं पहुँच पाती। दूसरा, हेमरेज स्ट्रोक, जो खून की नलियों के फटने या खून के थक्के बनने से होता है। तीसरा, ट्रांसिएंट इश्चेमिक अटैक, जिसे मिनी स्ट्रोक भी कहा जाता है, जिसमें खून की आपूर्ति अस्थायी रूप से कम हो जाती है लेकिन स्थायी नुकसान नहीं होता।
स्ट्रोक का खतरा उन लोगों को अधिक होता है जो मोटे होते हैं, शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहते हैं और अधिक शराब, तंबाकू या अवैध ड्रग्स का सेवन करते हैं। इसके अलावा, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, दिल की बीमारी और अधिक फैटी आहार लेने से भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि लोग अपनी जीवनशैली को सुधारें, नियमित रूप से व्यायाम करें, और अपने स्वास्थ्य की निगरानी रखें। स्ट्रोक से बचने के लिए सही जीवनशैली अपनानी चाहिए, जैसे स्वस्थ आहार, व्यायाम, वजन कम करना, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना, और मानसिक तनाव से बचना। इसके साथ ही, यदि किसी को पहले से ही दिल की बीमारी, डायबिटीज या उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं हैं, तो उनका इलाज सही समय पर करवाना चाहिए। इस तरह की सावधानियों से स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और लोगों को बेहतर जीवन जीने का अवसर मिल सकता है।
बता दें कि स्ट्रोक एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसमें दिमाग में खून की आपूर्ति अचानक कम हो जाती है या बंद हो जाती है। यह स्थिति दिमाग की कोशिकाओं के लिए खतरनाक होती है क्योंकि इन कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति कम हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप वे मरने लगती हैं। अगर दिमाग की कोशिकाओं को कुछ मिनटों तक खून नहीं मिलता, तो वे मरने की प्रक्रिया शुरू कर देती हैं, जिससे मरीज की मौत भी हो सकती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह जरूरी है कि हम स्ट्रोक के प्रति सतर्क रहें और इसका सही समय पर इलाज करवाएं।
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