चार महीनों में बांग्लादेश को करीब दो लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान
नई दिल्ली । बांग्लादेश का वर्तमान अब उसकी गलत नीतियों के कारण और भारत विरोधी ताकतों के प्रभाव में उलझ गया है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बांग्लादेश की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। बांग्लादेश की 94 फीसदी सीमा भारत के साथ लगती है, जो उसकी सुरक्षा और व्यापार दोनों के लिए बहुत अहम है। भारत से खाद्य सामग्री, कपास, ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, और अनाज जैसी वस्तुओं का निर्यात बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। चार महीनों में ही बांग्लादेश को करीब दो लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है। भारत और बांग्लादेश के बीच 2022-23 में करीब 16 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था, जिसमें भारत ने 14 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था।
हाल ही में बांग्लादेश ने पाकिस्तान और चीन से मदद पाने की कोशिश की, लेकिन भू-भौगोलिक और आर्थिक बाधाओं ने उसे मुश्किल में डाल दिया है। बंगाल की खाड़ी से चीन और पाकिस्तान से सामान मंगाना महंगा साबित हो रहा है। बांग्लादेश ने पाकिस्तान से 25 हजार टन चीनी आयात की, लेकिन यह आर्थिक दृष्टि से अस्थिर और कम प्रभावी साबित हुई। बांग्लादेश के प्रमुख कपड़ा उद्योग पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उसकी जीडीपी में 11 फीसदी योगदान देने वाला यह उद्योग भारत से कपास पर निर्भर है। भारत अपने कुल कपास उत्पादन का 35 फीसदी बांग्लादेश को निर्यात करता है। यदि यह आपूर्ति रुक जाती है, तो बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग पूरी तरह तबाह हो सकता है, जिससे बेरोजगारी और महंगाई बढ़ सकती है।
शेख हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश की जीडीपी विकास दर 6.3फीसदी तक पहुंच गई थी, लेकिन अगस्त के बाद बिगड़े हालातों ने इस पर बहुत बुरा असर डाला है। मूडीज और एडीबी जैसी एजेंसियों ने विकास दर को 5 फीसदी से नीचे जाने का अनुमान लगाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति उसके भारत विरोधी रुख और गलत सहयोगियों के चुनाव का परिणाम है। भारत का सहयोग न केवल उसकी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखता था, बल्कि महंगाई पर भी नियंत्रण करता था। अब देखना है बांग्लादेश अपनी गलतियों से सबक लेगा या नहीं।


