नई दिल्ली । विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया जा रहा है। हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज योजना के तहत इस ऐतिहासिक ट्रैक पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी है, जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण को संरक्षित किया जा सके। रेल मंत्रालय की टीम ने हाइड्रोजन ट्रेन चलाने के लिए सर्वे लगभग पूरा कर लिया है।
इन ट्रेनों की खासियत यह होगी कि ये डीजल के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से संचालित होंगी, जिससे धुएं की बजाय केवल पानी की भाप निकलेगी। यह पहल प्रदूषण को काफी हद तक कम करेगी और ट्रैक के किनारे स्थित हरे-भरे पेड़ों तथा पर्यावरण को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाएगी। इसके साथ ही, बड़ोग रेलवे स्टेशन पर एक हाइड्रोजन फ्यूल प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।
सर्वे रिपोर्ट पर मंथन के बाद रेल मंत्रालय जल्द ही हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल की अनुमति दे सकता है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 में ही हेरिटेज रेल लाइनों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना में इसे शामिल किया था। रेल मंत्रालय ने हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज योजना के तहत कुल 35 हाइड्रोजन ट्रेनों में विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक को भी सम्मिलित किया है। उल्लेखनीय है कि जहां देश की पहली ब्रॉडगेज हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चल रही है, वहीं कालका-शिमला ट्रैक पर यह भारत की पहली नैरो गेज हाइड्रोजन ट्रेन होगी। 122 साल पुराने कालका-शिमला रेलवे ट्रैक में 103 सुरंगें, 800 से अधिक पुल और लगभग 900 तीखे मोड़ हैं, जो इसे एक अनूठा और चुनौतीपूर्ण मार्ग बनाते हैं।
कालका-शिमला रेलवे समिति के सदस्य सुभाष वर्मा ने पुष्टि की कि केंद्रीय रेल मंत्रालय इस परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज योजना के तहत यह कार्य प्रगति पर है। आगामी दिनों में इस संबंध में महत्वपूर्ण बैठकें होनी हैं, जिसके बाद हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन से क्षेत्र को काफी लाभ मिलेगा। बड़ोग में फ्यूल प्लांट के लिए भी जगह का चयन कर लिया गया है और टीम ने उसका दौरा भी किया है।
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