◆श्रेणी-2 के 32 बालू घाटों की हो चुकी है नीलामी, 29 घाटों पर अभी बालू उठाव की राह में अड़चन
◆छोटा कामती, हरिपुर और कटनी घाट को ही मिली ईसी, सीटीओ समेत जरूरी प्रक्रियाओं की मंजूरी
डॉ.सुमन सिंह
दुमका। झारखंड में बालू खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की 15 अक्टूबर तक लगी रोक अब हट गई है।पर बालू खनन पर एनजीटी की रोक हटने के बाद भी दुमका जिले में खनन और उठाव सामान्य होने की उम्मीद नहीं है। जिले में श्रेणी-2 के कुल 32 बालू घाटों की नीलामी हो चुकी है, लेकिन अब तक केवल तीन घाटों को ही बालू खनन के लिए जरूरी प्रक्रियाओं की मंजूरी मिल सकी है। ऐसे में एनजीटी की रोक हटने के बावजूद फिलहाल जिले के केवल तीन बालू घाटों से ही खनन और उठाव का रास्ता साफ हुआ है।जिन तीन घाटों को आवश्यक मंजूरी मिली है, उनमें रानेश्वर प्रखंड का छोटा कामती घाट, जरमुंडी प्रखंड का हरिपुर घाट और जामा प्रखंड का कटनी घाट शामिल हैं। इन घाटों के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति (ईसी), संचालन सहमति (सीटीओ), विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), ग्राम सभा की सहमति के साथ ही डीड एवं अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। शेष 29 घाटों के मामले में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण वहां से बालू उठाव शुरू होने में अभी समय लग सकता है।
दुमका जिले में श्रेणी-2 के 32 बालू घाटों की नीलामी पूरी होने के बाद उम्मीद थी कि एनजीटी की रोक हटते ही बालू खनन की प्रक्रिया गति पकड़ लेगी। लेकिन नीलामी के बाद भी अधिकांश घाटों पर पर्यावरणीय और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो सकी हैं।नतीजतन, जिन घाटों की नीलामी हो चुकी है, उनमें से अधिकांश से तत्काल बालू उठाव संभव नहीं दिख रहा है। केवल तीन घाटों को जरूरी मंजूरी मिलने के कारण जिले में बालू की उपलब्धता सीमित रहने की आशंका है।
बालू की उपलब्धता सीमित रहने पर निर्माण कार्य कराने वाले लोगों, भवन निर्माताओं और ठेकेदारों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आपूर्ति और मांग के बीच अंतर बढ़ने पर बालू की कीमतों पर भी दबाव पड़ने की आशंका है।


